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आज मनाया जा रहा हैं गुरु पर्व

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कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्री गुरु नानक जी का जन्मदिन मनाया जाता है। गुरू नानक जी की जयंती या गुरु पर्व, सिख समुदाय में मनाए जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण दिन है। यह दिन गुरु नानक जी के जन्म को स्मरण करता हैं। इसे गुरु पर्व या 'गुरुओं का उत्सव' के नाम से भी जाना जाता है। गुरु नानक जी का जन्म 548 वर्ष पहले 15 अप्रैल 1469 में तलवंडी में हुआ था। ये स्थान पाकिस्तान में है और इस स्थान को ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है। इस पर्व की शुरुआत दो दिन पहले से ही गुरु ग्रंथ साहिब के पाठ से शुरु हो जाती है। 48 घंटे तक चलने वाले इस पाठ को अखंड पाठ कहा जाता है। गुरु पर्व के अवसर पर धर्म ग्रंथों को सजाया जाता है और उनका शब्द कीर्तन किया जाता है। इसके साथ निशान साहिब व पंच प्यारों की झाकियां निकाली जाती हैं, इसमें वो सिख धर्म के झंडे लिए होते हैं और गुरु ग्रंथ साहिब को पालकी में लेकर चला जाता है। इसे नगर कीर्तन के नाम से जाना जाता है। Image Credit उन्होंने बचपन से ही रूढ़िवादिता के विरुद्ध संघर्ष की शुरुआत कर दी थी, जब उन्हें 11 साल की उम्र में जनेऊ धारण करवाने की रीत का पालन किया जा रहा था। जब पं...

दीपावली का त्यौहार

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Image Credit दीपावली का त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता हैं। इस वर्ष यह 7 नवम्बर को देशभर में मनाया जा रहा है। अमावस्या के दिन मनाए दाने वाले इस त्यौहार को हिन्दू धर्म के रोशनी के पर्व यानी 'दीपावली' के नाम से जाना जाता हैं। पुराणों के मुताबिक उस दिन से यह त्यौहार मनाया जा रहा है जब श्रीराम लंकापति रावण को पराजित कर और अपना वनवास समाप्त कर अयोध्या वापस लौटे थे। उस दिन अयोध्यावासियों ने कार्तिक अमावस्या की रात अपने-अपने घरों में घी के दीप प्रज्वलित कर खुशियां मनाई थी। क्या करते हैं इस दिन? दीपावली पर विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन करने की परंपरा है। मां लक्ष्मी के साथ-साथ गणेश पूजन, कुबेर पूजन भी किया जाता है। मान्यता है कि दिवाली पर उपासक को अपने सामर्थ्य के अनुसार व्रत करना चाहिए। उपासक या तो निर्जल रहकर या फलाहार व्रत कर सकता है। दीपावली लक्ष्मी पूजन की विधि • मां लक्ष्मी और गणेशजी की प्रतिमाओं को चौकी पर रखें। ध्यान रहें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर रहें और लक्ष्मीजी की प्रतिमा गणेशजी के दाहिनी ओर रहें। • कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारिय...

आज हैं नरक चतुर्दशी, पाप और नर्क से मुक्ति हेतु किया जाता हैं पुजन

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नरक चतुर्दशी को नरक चौदस या नर्का पूजा, रूप चतुर्दशी और छोटी दीपावली के नाम से भी मनाते हैं। यह पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन होता है जो इस बार 6 नवंबर 2018 को मंगलवार के दिन मनाया जायेगा। दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी के दिन संध्या के पश्चात दीपक प्रज्जवलित किए जाते हैं। इस चतुर्दशी का पूजन कर अकाल मृत्यु से मुक्ति तथा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यमराज जी की पूजा व उपासना की जाती है। क्या हैं आज के दिन का महत्व? Image Credit ऐसा माना जाता है कि इस दिन प्रातःकाल तिल का तेल लगाकर अपामार्ग यानि चिचड़ी की पत्तियां जल में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है। इस दिन व्रत रखने का भी अपना महत्व है। कहते है कि रूप चौदस पर व्रत रखने से भगवान श्रीकृष्ण व्यक्ति को सौंदर्य प्रदान करते हैं। इस व्रत में प्रात स्नान के बाद भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण के दर्शन करने जा उत्तम होता हैं। नरक चतुर्दशी से जुड़ी पौराणिक कथाएं इस रात दीए जलाने की प्रथा के संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं हैं। एक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी दुर्दांत असुर...

कानोड़: जानिए पिली मिटटी लाने की परंपरा

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लक्ष्मी जी को अपने घर बुलाने के लिए पीली मिट्टी लाने की परंपरा मेवाड़ क्षेत्र में बहुत समय से रही है। इसी वजह से आज धनतेरस के पर्व पर नगर की महिलाए पीली मिट्टी लेने के लिए नगर से दो-तीन किलोमीटर दूर चारों दिशाओं में खोड़ो का खेड़ा,भाणपा, राजपुरा की तरफ की ओर गयी। इस दौरान प्रत्येक माहौल्ले से महिलाए खदान पर जाकर पूजा-अर्चना करके मिट्टी खोदने का कार्य करती है। अपने पात्र के भरने के बाद महिलाए एक अंतिम बार और खोदती है क्यूंकि ऐसी मान्यता है कि यह अंतिम खुदाई हमें अगले जनम में सोने के रूप में मिलेगी। इस परंपरा का पालन आज भी हिंदू धर्म में किया जाता है। अपनी परंपराओं को आगे निभाने के महिलाए अपनी बच्चियों को भी साथ ले जाती हैं।  धनतेरस के दिन अपने घर में पकवान की जगह लस्सी बनाकर भोग इत्यादि धरते है। संध्या होने पर लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं और अपने घर में वर्षभर लक्ष्मी जी का निवास रहे इसका आह्वान करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परंपरा है, कहीं पुराने बरतन देकर नए खरीदे जाते हैं कई सोने-चांदी के आभूषण खरीदे जाते है। इस तरह से हरे क्षेत्र में अलग-अलग परंपरा है लेकिन मेवाड़ क्षेत्...

दिवाली के बोनस में मिली कार

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Image Credit गुजरात के सूरत में एक और बार डायमंड किंग सावजी ढ़ोलकिया ने दिवाली पर धमाका किया है। अपने कर्मचारियों को दिवाली बोनस देकर अपने 600 कर्मचारियों को दिवाली बोनस में एक कार देने का फैसला किया है। सूरत सहित देश-विदेश में "हरे कृष्णा डायमंड एक्सपोर्ट" कंपनी के नाम से हीरे का कारोबार करते है। कर्मचारियों के लिए और भी बड़ी ख़ुशी की बात यह रही की जहा उनके बॉस ने उनको एक गाड़ी तोहफे में दी वही उस गाड़ी की चाबी सूरत में आये भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा उनको दी गयी। Image Credit - ABP News सावजी ढ़ोलकिया की कंपनी हीरों के एक्सपोर्ट का काम करती है। गुजरात के सूरत में कंपनी का मुख्यालय है। 2005 में इस कंपनी ने "कृष्णा" नाम का ब्रांड निकाला था जिसके देश भर में करीब 6000 स्टोर है। कंपनी हर महीने करीब 40 हज़ार कैरट के जेवरात तैयार करती है और दुनिया के 70 से ज़्यादा देशों में एक्सपोर्ट करती है। कंपनी का सालाना 6000 करोड़ रूपए का टर्न ओवर है। सावजी ढ़ोलकिया का कहना की उन्हें कार गिफ्ट करते हुए अच्छा लग रहा है और यदि वे कर्मचारियों को इस प्रकार के बोनस देते है तो उन्हे...

देश मना रहा है 86 वां वायुसेना दिवस

आज  पूरा  देश  86 वां वायुसेना  दिवस  मना  रहा  है। भारतीय वायुसेना को आधिकारिक तौर पर ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा 8 अक्टूबर 1932 को स्थापित किया गया था। वायुसेना भारतीय सशस्त्र सेना का एक अंग है जो वायु युद्ध, वायु सुरक्षा, और वायु चौकसी का महत्वपूर्ण काम देश के लिए करती है। सभी संभावित खतरों से भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा करना, सशस्त्र बलों की अन्य शाखाओं के साथ सामंजस्य स्थापित कराना और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा भारतीय वायुसेना की प्राथमिक जिम्मेदारी है। भारतीय वायुसेना युद्ध के मैदान में भारतीय सेना के सैनिकों को हवाई समर्थन तथा सामरिक और रणनीतिक एयरलिफ्ट करने में भी सहयोग देती है। वायुसेना से जुड़ी कुछ खास बाते- •भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। इसी मौके को याद करते हुए हर साल इस दिन को भारतीय वायुसेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। • आजादी से पहले इसे रॉयल इंडियन एयरफोर्स के नाम से जाना जाता था मगर बाद में इसके नाम से रॉयल शब्द को हटा दिया गया। • भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है। • भारतीय वायुसेना के पास कुल...

हिन्दी दिवस आज

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Image Credit   हिन्दी के ऐतिहासिक अवसर को याद करने के लिये हर साल 14 सितंबर को पूरे देश में हिन्दी दिवस मनाया जाता है। इसको हिन्दी दिवस के रुप में मनाना शुरु हुआ था क्योंकि वर्ष 1949 में 14 सितंबर को संवैधानिक सभा के द्वारा आधिकारिक भाषा के रुप में देवनागरी लिपी में लिखी हिन्दी को स्वीकृत किया गया था। हिन्दी दिवस क्यों मनाया जाता है ? देश में हिन्दी भाषा की महत्ता को प्रदर्शित करने के लिये पूरे भारत में हिन्दी दिवस मनाया जाता है। भारत में हिन्दी भाषा का बड़ा इतिहास है जो इंडों-यूरोपियन भाषा परिवार के इंडों-आर्यन शाखा से संबद्ध रखता है। भारत की सरकार ने देश की आजादी के बाद मातृभाषा को आर्दश के अनुरुप बनाने के लिये एक लक्ष्य बनाया अर्थात हिन्दी भाषा को व्याकरण और वर्तनीयुक्त करने का लक्ष्य। इसे भारत के अलावा मॉरीशस, पाकिस्तान, सुरीनाम, त्रिनिदाद और कुछ दूसरे देशों में भी बोली जाता है। इसे 258 मिलीयन लोगों द्वारा मातृभाषा के रुप में बोली जाती है और ये दुनिया की 5वीं लंबी भाषा है। 14 सितंबर प्रत्येक वर्ष एक कार्यक्रम के रूप में मनाया जाता है,क्योंकि भारत की संविधान सभा द्वारा 14 सितंबर...

विघ्नहर्ता श्री गणेशा का आगमन

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Image Credit गणेश चतुर्थी के दिन ही बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्‍य के देवता भगवान गणेश का जन्‍म हुआ था। इस पर्व को देश भर में खास तौर से महाराष्‍ट्र और मध्य प्रदेश में बेहद उत्‍साह के साथ मनाया जाता है। 10 दिन तक चलने वाला यह उत्‍सव गणेश चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्‍त होता है। गणेश चतुर्थी के दिन भक्‍त प्‍यारे बप्‍पा की मूर्ति को घर लाकर उनका सत्‍कार करते हैं। फिर 10वें दिन यानी कि अनंत चतर्दशी को विसर्जन के साथ मंगलमूर्ति भगवान गणेश को विदाई जाती है। साथ ही उनसे अगले बरस जल्‍दी आने का वादा भी लिया जाता है। जानिए गणेश जी को क्यों चढ़ाया जाता है मोदक? पुराणों में मोदक का वर्णन है। मोदक का अर्थ होता है आनंद (खुशी) और भगवान गणेश को हमेशा खुश रहने वाला माना जाता है। इसी वजह से उन्हें मोदक का भोग लगाया जाता है। मोदक को ज्ञान का प्रतीक भी माना जाता है और भगवान गणेश को ज्ञान का देवता भी माना जाता है। इसलिए भी उनको मोदक का भोग लगता है। गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है? हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार भाद्रपद यानी कि भादो माह की शुक्‍ल पक्ष चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्‍म हुआ था। उनके ज...

कानोड़: महिलाओं ने मनाया बछ बारस का त्योहार

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हर साल की तरह, इस साल भी कानोड़ नगर में उत्साह के साथ मनाया गया बछ बारस त्योहार। बछ बारस प्रतिवर्ष जन्माष्टमी के चार दिन पश्चात भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की द्वादशी के दिन मनाया जाता है इसलिए इस गोवत्स द्वादशी भी कहते है। भगवान कृष्ण के गाय और बछड़ो से बड़ा प्रेम था इसलिए इस त्यौहार के दिन गायो और बछड़ो की पूजा की जाती है। इस दिन विवाहित महिलाये पुत्र प्राप्ति और मंगल कामना के लिए व्रत करती है। इस दिन अंकुरित चने, मटर, मुंग आदि का सेवन किया जाता है। मान्यता के मुताबिक, आज के दिन गाय के दूध और उससे बनी वस्तुओ, गेहू, कटी हुयी सब्जियों और फलों का सेवन नही किया जाता। पूजन की विधी पूजा के लिए भैंस का दूध और दही, भीगा हुआ चना और मोठ लेकर इसमें मोठ-बाजरे में घी और चीनी मिलाकर, गाय के रोली का टीका लगाकर चावल के स्थान पर बाजरा लगाया जाता हैं। बायने के लिए एक कटोरी में भीगा हुआ चना, मोठ, बाजरा और रुपया रखे। इस दिन बछड़े की पूजा की जाती है यदि गाय की पूजा नही कर सकते तो एक पाटे पर मिटटी से बछबारस बनाते है और उसके बीच में एक गोल मिटटी की बावडी बनाते है। उसे थोडा दूध दही से भर कर फिर सब चीजे चढाकर...

5 सितम्बर : शिक्षक दिवस

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Image Credit - TimesofIndia आज 5 सितम्बर है, और यह दिन प्रत्येक वर्ष हम बड़े उत्साह और उल्लास के साथ शिक्षक दिवस के रुप में मनाते हैं। हर साल 5 सितम्बर, सम्पूर्ण भारत में शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है। वास्तव में, 5 सितम्बर, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन है, जो महान विद्वान और शिक्षक थे। अपने बाद के जीवन में वे गणतंत्र भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति बने। पूरे देश के विद्यार्थी इस दिन अपने शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए मनाते हैं। यह सही कहा गया है कि, शिक्षक हमारे समाज की रीढ़ की हड्डी होते हैं। वे विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण करते हैं और उन्हें देश के आदर्श नागरिक के आकार में ढालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुःसाक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नम: ॥ एक शिक्षक समाज का मार्गदर्शिक है। शिक्षक एक पीढ़ी को विकसित करते हैं और यही पीढ़ी भविष्य में राष्ट्र को चलाती है। इस प्रकार, मूल रूप से वह शिक्षक है जो राष्ट्र बनाने के लिए नींव रखता है। एक शिक्षक की भूमिका ऐसे कोच की तरह होती है जो ओलंपिक जैस...

पढ़ें शिक्षक दिवस से जुड़ी ये बातें

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डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को 1962 से शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने अपने छात्रों से जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा जताई थी। यहां पढ़ें शिक्षक दिवस से जुड़ी ये बातें: 1. 1962 में देश के राष्ट्रपति बने डॉक्टर राधाकृष्णन एक महान शिक्षाविद् और शिक्षक के रूप में दुनियाभर में जाने जाते हैं। 2. डॉक्टर राधाकृष्णन के पिता उनके अंग्रेजी पढ़ने या स्कूल जाने के खिलाफ थे। वह अपने बेटे को पुजारी बनाना चाहते थे। 3. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन बेहद ही मेधावी छात्र थे और उन्होंने अपनी अधिकतर पढ़ाई छात्रवृत्ति के आधार पर ही पूरी की। 4. सर्वपल्ली राधाकृष्णन छात्रों में इतने लोकप्रिय थे कि जब वह कलकत्ता जा रहे थे, उन्हें मैसूर विश्वविद्यालय से रेलवे स्टेशन तक फूलों की बग्घी में ले जाया गया था। 5. जाने—माने प्रोफेसर एच.एन.स्पेलडिंग डॉक्टर राधाकृष्णन के लेक्चर से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय में उनके लिए चेयर स्थापित करने का फैसला कर लिया। 6. शिक्षा के क्षेत्र में डॉक्टर राधाकृष्णन के अभूतपूर्व योगदान के लिए 1931 में उन्हें ब्रिटिश सरकार ने ...

बाल कृष्ण की अद्भुत लीलाएं

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भगवान बाल कृष्णा  श्री कृष्णा के जन्म की कथा: श्री कृष्ण का जन्म उत्तरी भारत में लगभग 5000 साल पहले हुआ था। पुराणो के अनुसार श्री कृष्ण के जीवन को द्वापर युग के अंत समय में जन्म लिया और कलियुग के शुरुआत होने तक वे पृथ्वी पर रहे । माखन चोरी करने वाले नटखट बाल कृष्ण का जन्म अपने माता-पिता देवकी और वासुदेव को मुक्त कराने के लिए जेल में हुआ । अपने जन्म के समय, उनका जीवन खतरे में था क्योंकि मामा कंस उसे जन्म होते ही मारने के लिए तैयार बैठे थे। यह आकाशवाणी हुई थी कि देवकी की आठवीं संतान कंस का वध करेगा। श्रीकृष्ण आठवें पुत्र थे, जब उनका जन्म हुआ तो अचानक कारगर के सभी सुरक्षा कर्मी सो गए और सारे द्वार खुल गए, तब वासुदेव बालक कृष्ण को अपने मित्र नन्द के घर गोकुल छोड़ आये। नंद एक साधारण जीवनशैली जीते थे और स्थानीय ग्वालो के समुदाय में प्रमुख थे। बाल श्रीकृष्ण अपने नटखट स्वाभाव से सबको तंग करते, उनके माखन चोरी के किस्से तो सुप्रसिद्द है, कभी वे माखन चुरा कर कहते तो कभी गोपियों की मटकी से माखन गिरा के भाग जाते, तो कभी अपनी बांसुरी की धुन से सबको मंत्र मुग्ध कर लेते, लोग कहते है की उनकी ...

श्री कृष्णा जन्माष्टमी के व्रत का महत्व

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Image Credit - livehindustan श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार हर वर्ष बहुत उल्लास और उमंग के साथ मनाते है। यह त्यौहार भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत का भी बहुत महत्व है।  कहते है की भगवन श्रीकृष्ण का जन्म मनुष्य के कष्टों के निवारण और उनके कल्याण करने के लिए हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण पृथ्वी के पालनकर्ता भगवन विष्णु के आठवे अवतार माने जाते हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत और पूजन का भी खास महत्व है। लोग श्री कृष्ण जैसे पुत्र की प्राप्ति के लिए इस दिन उपवास करते हैं । अष्टमी के दिन भगवान कृष्ण ने लिया जन्म  जन्माष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी, सैटम आथम, गोकुलष्टमी, अष्टमी रोहिणी, श्रीकृष्ण जयंती और श्री जयंती भी कहा जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म सावन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की रात को हुआ था। भगवान कृष्ण ने भक्तों की रक्षा करने के लिए अष्टमी की आधी रात को जन्म लिया था। श्रीकृष्ण ने गुरू, प्रभु, प्रेमी और बाल रूप आदि अनेक रूपों में लोगों का मन मोहा और अपने भक्तों का मार्गदर्शित किया। इसलिए विभिन्न रूपों में श्...

18 वें एशियाई खेल 2018 में भारत ने जीते पदक

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एशियन खेल 2018 में भारत के खिलाड़ी लगातार कामयाबी के झंडे बुलंद कर रहे हैं| अभी तक भारतीय दल को 13 स्वर्ण, 22 रजत और 29 कांस्य मिल चुके हैं| Image Credit - News Nation इस तरह भारत के पदकों की कुल तादाद बढ़कर 63 हो गई है | पदक तालिका में भारत फिलहाल 8वें स्थान पर है | 2018 एशियाई खेल (इंडोनेशियाई: पेस्ता ओलाह्रागा, एशिया 2018, एशियाई खेल 2018), आधिकारिक तौर पर 18 वें एशियाई खेलों के रूप में जाना जा रहा है और जकार्ता-पालेम्बैंग 2018 के नाम से भी जाना जाता है, 18 अगस्त से 2 सितंबर तक एक एशियाई बहु-खेल आयोजन आयोजित किया जा रहे है। जकार्ता और पालेम्बैंग के इंडोनेशियाई शहरों में 2018 एशियाई खेल आयोजित किया जा रहा है। खेल स्वर्ण पदक रजत पदक कांस्य पदक कुल एथलेटिक्स 7 10 2 19 शूटिंग 2 4 3 9 कुश्ती 2 0 1 3 रोइंग 1 0 2 3 टेनिस 1 0 2 3 तीरंदाजी 0 2 0 2 घुड़सवार 0 2 0 2 सेलिंग 0 1 2 3 बैडमिंटन 0 1 1 2 कबड्डी 0 1 1 2 कुराश 0 1 1 2 स्क्वाश 0 0 4 4 वुशु 0 0 4 4 ब्रिज 0 0 2 2 टेबल टेनिस 0 0 2 2 सेपकटकराव (किक वॉलीबॉल) 0 0 1 1

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