कानोड़: जानिए पिली मिटटी लाने की परंपरा
लक्ष्मी जी को अपने घर बुलाने के लिए पीली मिट्टी लाने की परंपरा मेवाड़ क्षेत्र में बहुत समय से रही है। इसी वजह से आज धनतेरस के पर्व पर नगर की महिलाए पीली मिट्टी लेने के लिए नगर से दो-तीन किलोमीटर दूर चारों दिशाओं में खोड़ो का खेड़ा,भाणपा, राजपुरा की तरफ की ओर गयी। इस दौरान प्रत्येक माहौल्ले से महिलाए खदान पर जाकर पूजा-अर्चना करके मिट्टी खोदने का कार्य करती है। अपने पात्र के भरने के बाद महिलाए एक अंतिम बार और खोदती है क्यूंकि ऐसी मान्यता है कि यह अंतिम खुदाई हमें अगले जनम में सोने के रूप में मिलेगी। इस परंपरा का पालन आज भी हिंदू धर्म में किया जाता है। अपनी परंपराओं को आगे निभाने के महिलाए अपनी बच्चियों को भी साथ ले जाती हैं।
धनतेरस के दिन अपने घर में पकवान की जगह लस्सी बनाकर भोग इत्यादि धरते है। संध्या होने पर लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं और अपने घर में वर्षभर लक्ष्मी जी का निवास रहे इसका आह्वान करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परंपरा है, कहीं पुराने बरतन देकर नए खरीदे जाते हैं कई सोने-चांदी के आभूषण खरीदे जाते है। इस तरह से हरे क्षेत्र में अलग-अलग परंपरा है लेकिन मेवाड़ क्षेत्र में केवल पीली मिट्टी लाने की परंपरा रही है जो आज तक कायम रही है। चाहे अपने घर भले पक्के बन गए हो लेकिन चौका देने के लिए आज भी घर के बाहर रंगोली के लिए पीली मिट्टी का ही उपयोग करते हैं।
अब अपने व्हाट्सएप पर सभी स्थानीय अपडेट प्राप्त करें, क्लिक करे
आज के सभी समाचार:

