चना फसल के खराबे से हो रही है किसान को मुश्किल
चने की खेती सिंचित एवं असिंचित दोनों ही परिस्थितियों में की जाती है। पिछले दो दशकों में सिंचाई की अतिरिक्त सुविधाओं के कारण धान और गेहूं की फसलों ने चने के कृषि योग्य क्षेत्रों को प्रतिस्थापित किया है। धान और गेहूं फसल चक्र के कारण इन खेतों की उर्वरकता में कमी आई है। साथ ही साथ धान की खेती के बाद चने की फसल बोने पर चने की बुवाई देर से होती है।
जिससे तना छेदक कीटों तथा शुष्क मूल विगलन इत्यादि का प्रकोप अधिक होता है। दूसरी तरफ मौसम की मार से बची रबी की चना फसल कीट एवं उगठा रोग से बर्बाद हो रही है। उपखंड क्षेत्र वल्लभनगर के मेनार, नवानिया, रुंडेडा गांवों में किसानों की चना फसलें खराब होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। इस कारण किसान परेशान हैं, इस प्रकार की स्थिति क्षेत्र के कई गांव में हैं।
नवानिया के डालचंद जणवा, रुंडेडा के भेरूलाल व मांगीलाल जणवा ने बताया कि चने की फसल में इस बार कीड़ा लग जाने के कारण फसल खराब होती जा रही है और यह कीड़ा हर पत्ते पर मौजूद है और फसल को निरतंर खा रहा है। यह स्थिति किसी एक गांव की नही कई गाँवो की है, इस कारण चने की फसल खेतों में खड़ी सूख रही है। चने का पौधा अंकुरित होकर जमीन से बाहर निकलकर बड़ा होता है और यह कीड़ा इन पत्तो और फूलो को खा जाता हैं।
जिससे पौधा बड़ा भी नही हो पा रहा है और चने के पौधे पूरी तरह से पीले होने गए हैं। इसके बावजूद कृषि विभाग इस बीमारी के रोकथाम के उपाय की जानकारी किसानों को नहीं दे रहा है। इस बार मौसम के साथ देने के कारण रबी की फसलों में गेहूं की फसलें खेतों में लहलहाने लगी है। वहीं चना फसल में पीलास छाई होने के कारण किसानों की नींद उड़ हो गई है। केवल मेनार, नवानिया, रुंडेडा गांव में ही तीन दर्जन से अधिक किसानों के खेतों पर चने की फसल कीड़ा और उगठा रोग होने के कारण सूखकर पीली हो गई है। क्षेत्र के गांवों में इस समय किसान कीड़ा और उगठा रोग नामक बीमारी से परेशान हैं।
अभी तक तो किसान ठंड और ओलो से परेशान था, वहीं अब किसान चने में कीड़ा और उगठा रोग नामक बीमारी से परेशान हैं। किसानों द्वारा बोई गई चने की फसल पूरी तरह बर्बाद हो रही है, लेकिन कृषि विभाग ने इस बीमारी के रोकथाम के कोई उपाय नही बताएं हैं। पिछले साल पड़ी जोरदार ठंड ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया था। ठंड के कारण सब्जी सहित चना, मसूर, मक्का, गेहूं आदि फसलों में काफी नुकसान हो गया था, वहीं इस वर्ष चने की फसल बर्बाद हो रही है।
कीड़े से रोकथाम के लिए किसान कर रहे दवाई का छिड़काव
डालचंद जणवा ने बताया कि मेनार नेशनल हाइवे 76 स्थित तीनमुखी पुलिया के समीप 25.5 बीघा भूमि में से 22 बीघा भूमि में चने की फसल सिंजारे पर और नवानिया में 28 बीघा स्वयं की जमीन पर काश्त की, लेकिन इस बार फसल में कीड़ा और रोग लगने से पत्ते खराब होने लग गए है। रविवार को तीन हज़ार रुपये की निट्रोमेक्स पावर एक लीटर और ट्रिसेल एक लीटर दवा 500 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर छिड़काव किया गया ताकि दवा छिड़काव से जो कीड़ा फसल को बड़ा रहा है और फूल नही निकलने दे रहा है उस कीड़े के मरने से फसल जीवंत हो जाएगी। एक बार दवाई के छिड़काव से फसल पर 30 दिन तक असर रहता है और 30 दिन बाद और कीड़ा रहता है तो दूसरी बार वापिस छिड़काव करना पड़ता है।
एक बिघा में लगता है 20 किलो चना
नवानिया के डालचंद जणवा ने बताया कि इस वर्ष उसके द्वारा ग्राम नवानिया और मेनार में 50 बीघा जमीन में चने की फसल की बुवाई की है जिसमे प्रतिबीघा 20 किलो चने की बुवाई की गयी जिसमे चने का बीज विशाल-2 वैरायटी के बीज की बुवाई की गयी। इसी तरह नवानिया के गोपीलाल जणवा और राजमल जणवा ने भास्कर को बताया कि दोनो द्वारा 100 बीघा भूमि में चने की फसल काश्त की है। नवानिया में इस वर्ष करीब एक हज़ार बीघा से भी ज्यादा जमीन पर चने की फसल की बुवाई की गई है ।
अच्छी फसल होने पर एक बीघा में 6 क्विंटल तक उत्पादन
मेनार के किसान मांगीलाल लुणावत, छोगालाल, कन्हैयालाल दियावत, प्रेमशंकर रामावत और भेरूलाल ठाकरोत ने बताया कि इस बार क्षेत्र में बारिश अच्छी हुई है, जिससे चने और गेहूँ की बम्पर पैदावार होगी। चने की फसल में कीड़ा साफ होने पर एक बीघा में 6 क्विंटल तक उत्पादन हो सकता है और सामान्य स्थिति रहने पर साढ़े चार से पांच क्विंटल तक पैदावार हो सकती है।
चने की फसल में एक लड़ लगने से चने के पत्तों एवं उसके फूलों को वह खा रही है, जिससे पौधा पीला पड़ रहा है। इसके लिए किसान प्रोफेनोफॉस 50 ईसी ढाई सौ एमएल प्रति बीघा, सवा लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छोटी अवस्था में ही छिड़काव करें तो इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। वही पोर्ट पर भी आ सकती है, उसके लिए हल्का छिड़काव करें तो फसल को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा। किसानों को जानकारी देने के लिए 2 दिन बाद कृषि विभाग की ओर से कैंप लगाया जाएगा।-मदन सिंह शक्तावत, सहायक कृषि अधिकारी, पंचायत समिति भींडर
रिपोर्ट - जयदीप चौबीसा


