उदयपुर । मेनार में दो पक्षियों की मौत के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों ने बरती एहतियात
उदयपुर । जिले के भिंडर तहसील के निकटवर्ती मेनार में दो पक्षियों की मौत के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों ने वनविभाग को मामले में एहतियात बरतने की राय दी है। विशेषज्ञ सतीश शर्मा ने बताया कि पक्षियों की मौत रूटीन प्रक्रिया भी हो सकती है। फिर भी संख्या ना बढ़े इसको लेकर हर समय विभाग की मॉनिटरिंग जरूरी है। वहीं जयपुर की सांभर झील में हजारों पक्षियों की मौत के बाद वनविभाग ने झीलों और तालाबों पर नजर रखना शुरू कर दिया है।
बता दें कि 24 नवंबर को पक्षी बार हेडेड गूज और स्वदेशी पर्पल स्वेम्फन पक्षी की मौत हो गई थी। जांच के लिए वन विभाग और पशुपालन विभाग उदयपुर की चिकित्सा टीम मौके पर आई और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में यह सामने आया कि बार हेडेड गुज की सिर पर चोट लगने से और पर्पल स्वेम्फन की शॉक लगने के कारण मौत हुई है। डीएफो अजीत उचोई ने बताया कि पक्षियों की मौत के बाद मौके पर अधिकारियों को भेजा गया था।
प्राथमिक जांच में नकारात्मक मौत से संबंधित कोई बात सामने नहीं आई है। फिर भी सभी तालाबों और झीलों में विभाग से मॉनिटरिंग की जा रही है। मेनार और आसपास के क्षेत्र बड़वल, नवानिया, डूंगला, भटेवर प्रमुख हैं। करीबन 100 से भी ज्यादा प्रजाति के प्रवासी पक्षी यहां आते है, इन पक्षियों में पेंटेड स्टोर्क, वूली नेक स्टोर्क, ओपन बिल स्टोर्क, ब्रह्मिनी शेल्डक, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, कॉमन पोचार्ड, स्पॉट बिल डक, कोंब डक, बार टेल्ड गोडविट, ब्लैक टेल्ड गोडविट, मार्श सैंडपाइपर, बार हेडेड गीज, लार्ज कोर्मोरेंट, स्पून बिल, गड़वाल आदि प्रमुख हैं।
स्थलीय पक्षी में ब्लू थ्रोट, बूटेड वार्बलर, येलो वैगटेल, मार्श हर्रियर, ब्लैक रेड स्टाट, रेड ब्रेस्टेड फ्लाईकैचर, पाइड क्रेस्टेड कुकु, यूरेशियन कुकु, इंडियन पिट्टा, ब्लैक हेडेड बंटिंग, रेड हेडेड बंटिंग आदि प्रमुख हैं।


