चक्रभवानी मंदिर पर आयोजित पाटोत्सव कार्यक्रम


हजारों साल की तपस्या के बाद मिलता है भारत भूमि पर जन्म-  साध्वी ज्योति

कानोड़। चक्रभवानी शक्तिपीठ बड़वाई पर जारी नौ दिवसीय पाटोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीमदभगवत कथा के तीसरे दिन कथा का रसपान करवा रहीं साध्वी ज्योती ने कहा कि "हजारों वर्षों की तपस्या के बाद भारत भूमि पर जन्म मिलता है। इसे व्यर्थ ना गवाएं और कहां की कलयुग में जो हरि सुमिरन करलेगा उसका मोक्ष निश्चित है। व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु अवश्य बनाना चाहिए क्योंकि स्वयं भगवान ने भी संत को अपना गुरु बनाया  मनुष्य को आवश्यकता से अधिक मोह नहीं करना चाहिए। अधिक अर्थ मनुष्य का अनर्थ करता है । मनुष्य कहता है कि दूनिया बदल गई लेकिन ऐसा नहीं है न मिर्ची ने अपना तीखापन बदला न ही आम ने मीठापन तो फिर दुनिया का बदलना कैसा? यहां केवल मनुष्य ने अपनी मानसिकता बदल दी है, जिससे पुरी व्यवस्था तहस-नहस हुई है।" साध्वी ने अपनी ओजस्वी वाणी में कहा कि "देश मे अगर मुठीभर बेईमान नहीं होते तो देश के यह हाल नहीं होते। हमे देश को आगे बढ़ाने के लिए समय देना होगा।   आज युवा राह भटक चुके है वही बच्चों को धार्मिक आचरणो से हम दुर करते जा रहे है। ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में हमें हमारी संस्कृति मोबाईल पर दिखानी पड़ेगी।  हम अगर अपना अस्तीत्व नहीं बचाएंगे तो सतित्व बचाना मु़श्किल हो जाएगा कोई विदेशी अक्रांता फिर हमारी संस्कृति को तहस- नहस करने आएगा ओर हमें अपनी भावी पीढ़ी को वहीं मनगढंत फर्जी इतिहास बच्चों को दिखाना पड़ेगा।"



साध्वी ने शराब सहित व्यसनों से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि " व्यसन मनुष्य को नर्क की तरफ धकेलते है , नशा करना ही है तो प्रभु नाम का करो जो जीवन को मोक्ष की ओर ले जाएगा। श्रीमदभगवत कथा ने हीं ज्ञान व वेराग्य को जीवित  किया। कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य अपना जीवन धन्य बना सकता है। आज हम लोग गौ माता पालने के बजाय कुत्ते को पालने में लगे है जिन घरो के बाहर प्रभु नाम लिखा जाता आज वहां कुत्तो से सावधान शब्द लिखकर हम धर्म की राह से विमुख हो रहे है। लकीरे भले ही हमारे हाथ में है लेकिन तकदीर प्रभु के हाथ में है, हमें खुद को अच्छा बनाकर समाज को संदेश देना है।"

कथा में जगत के रिश्तेदारो ने बीछाया जाल माया का-जीवन हे तेरे हवाले मुरलिया वाले,मन मंदिर में प्रभु़ को बिठाना बात हर एक के बस की नहीं है- मधूर आवाज में भजन सुनाकर श्रौताओ को झुमने को मजबूर कर दिया। कथा सुनने के लिए गाँव सहित आस-पास के गाँवो के ग्रामीण पहुंच रहे है। हर रोज कथा के बाद महाप्रसादी का आयोजन भी रखा गया है। जिसमें कथा सुनने वालो के साथ पुरे गाँव का भोजन मां के प्रागण में रखा गया है। मंदिर मण्डल के अनुसार कथा का समय प्रात: नौ बजे से १२ बजे तक व सायं को सात बजे से दस बजे तक का रखा गया है।

अब अपने व्हाट्सएप पर सभी स्थानीय अपडेट प्राप्त करें, क्लिक करे



आज के सभी समाचार:

recent posts

Recent Posts Widget

Facebook Follow